श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द अर्थ 100 best homonyms Words

आज हम इस ब्लॉग में श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द का अर्थ, परिभाषा तथा उनके 100 श्रुतिसम भिन्नार्थक उदाहरण, इत्यादि के बारे में बात करेंगे तो चलिए दूध पी कर आर्टिकल की सरुआत करके है ।


श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द का अर्थ क्या होता है

कुछ शब्द उच्चारण तथा रूप की दृष्टि में एक दूसरे के समान प्रतीत होते है। परन्तु उनके अर्थ एवं प्रयोग भिन्न होते हैं। ऐसे शब्द श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द या समरूपी भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।


समरूपी भिन्नार्थक / श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द की परिभाषा

वे शब्द जिनका उच्चारण पढ़ने व् सुनने में लगभग एक सामान सा लगे । लेकिन उन शब्दों का अर्थ अलग अलग होता है उन शब्दों को ही समरूपी भिन्नार्थक / श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहते है । जैसे :- कुल – कूल, आसान – आसन, ।


श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द Meaning In Hindi

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द को इंग्लिश में homonyms Words कहते हैं। जिसको हिन्दी व्याकरण में एक समान उच्चारण करने वाले शब्द कहते हैं।

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द
homonyms words / श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

100 श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द के उदाहरण

शब्द = अर्थ = उदाहरण

  • अणु – कण – अणु में ईश्वर व्याप्त है।
  • अनु – पीछे – तुम सत्पुरुषों के अनुगामी बनो।
  • अशक्त – असमर्थ – अशक्त हाथों से श्रम कैसे होगा?
  • आसक्त – मोहित – दुष्यंत शकुंतला पर आसक्त हो गया।
  • अलि – भँवरा – फूलों पर अलि मँडरा रहे हैं।
  • आली – सखी – आली, देखो कान्हा आए हैं।
  • अपेक्षा – तुलना – राम की अपेक्षा सोहन चतुर है।
  • उपेक्षा – तिरस्कार – बच्चे की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
  • अंस – कंधा – अंस पर दुशाला डाले कहाँ चले?
  • अंश – भाग – इस सम्पत्ति में तुम्हारा कितना अंश है?
  • अनल – आग – अनल का वेग रोकना कठिन है।
  • अनिल – वायु – अनिल के झोके आग की लपटें बढ़ा
  • रहे हैं।
  • अभिराम – सुंदर – हिमालय के अभिराम दृश्य मन को मोह लेते हैं।
  • अविराम – लगातार – कुछ विश्राम करो, अविराम काम करना ठीक नहीं।
  • अंत्य – अंतिम – अंत्य अक्षर पर छंद पढो, यह अंत्याक्षरी है।
  • अंत – समाप्ति – उसके दुखों का अंत नहीं।
  • इति + अंत – प्रारंभ से इति तक मुझे ही काम करना पड़ा।
  • ईति – उपद्रव – ईतियों से रक्षा करना जरूरी है।
  • उदार – दयालु, उदारजन ही इतना दान दे पाएँगे।
  • उदर – पेट – जो कमाया, उससे उदर भरा।
  • उपयुक्त – उचित – उपयुक्त शब्द का प्रयोग करो।
  • उपर्युक्त – ऊपर – उपर्युक्त कथन मेरा नहीं है।
  • उद्यत – तैयार – वह कार्य करने को उद्यत है।
  • उद्धत – उदंड – उद्धत छात्र अनुशासन भंग करते हैं।
  • ओर – तरफ – कभी इस ओर आ जाया करो।
  • और – तथा – राम और रहीम बाजार की ओर गए हैं।
  • कृपाण – तलवार
  • कृपण – कंजूस
  • कपट – छल – मित्रता में कपट के लिए कोई स्थान नहीं।
  • कपाट – किवाड़ – रात में कपाट बंद करके सोना चाहिए।
  • अज सृष्टिकर्ता हैं।
  • अजा का दूध पौष्टिक होता है।
  • सभी सिख कृपाण रखते हैं।
  • कृपण सेठ भला तुम्हें क्या देगा?
  • कुल – वंश – वह उच्च कुल में पैदा हुआ है।
  • कूल – किनारा – वाराणसी गंगा के कूल पर है।
  • क्षति – हानि – उस दुर्घटना में धन-जन की बड़ी क्षति हुई।
  • क्षिति – पृथ्वी – क्षिति पर क्या नहीं पैदा होता?
  • ग्रह – नक्षत्र – ग्रह सूर्य का चक्कर काटते हैं।
  • गृह – घर – घर पहुँचते ही गृहकार्य पूरा कर लेना।
  • ग्रंथ – पुस्तक – यह ग्रंथ तुलसी द्वारा रचित है।
  • ग्रंथी – गाँठ – तुम्हारे दुर्व्यवहार से मेरे मन में ग्रंथि पड़ गई है।
  • चिर – देर – चिरकाल से पानी नहीं बरसा।
  • चर्म – चमड़ी – चर्म-रोग गंदगी से फैलते हैं।
  • चपला – बिजली – वर्षा ऋतु में भी चमकती है।
  • चपल – चंचल – बच्चे होते हैं।
  • चरण – पैर – गुरू के वंदनीय हैं।
  • चारण – भाट – चारण तो बस गुणगान करते रहते हैं।
  • क्षात्र – क्षत्रिय – अर्जुन ने अपना क्षात्र धर्म निभाया।
  • संबंधी
  • जलद – मेघ – सावन आ गया, जलद घिर आए।
  • जलज – कमल – तालाब में जलजों की शोभा देखते हि बनती हैं।
  • जुआ – द्यूत – जुआ खेलना बुरा है।
  • जूआ – बैलों का जूआ – बैलों के कंधों पर जुआ रखो।
  • तरणि- सूर्य – आज तरणि बादलों की ओट में है।
  • तरणी – नाव – वह तरणी लेकर नदी में उतर गया।
  • तरुणी – युवती – वह बीस वर्षीय तरुणी है।
  • तरंग – लहर – समुद्र में तरंगे उठ रही हैं।
  • तुरंग – घोड़ा – मैं तुरंग पर सवारी करता हूँ।
  • नीर – पानी – कलश में नीर भरा है।
  • नीड़ – घोंसला – पक्षी नीड़ों को लौटने लगे।
  • नियत – निश्चित – मैं नियत स्थान पर प्रतीक्षा करने लगा।
  • नीयत – इच्छा – तुम्हारी ऋण लौटाने की नियत नहीं है।
  • प्रणय – प्रेम – प्रणय के कारण ही सीता राम के साथ वन गई।
  • परिणय – विवाह – धनुष टूटने पर राम और सीता का
  • परिणय हो गया।
  • मार्ग – पथ – यह पथ बहुत ही कठिनाइयों से भरा
  • मार्ग – पथ – यह पथ बहुत ही कठिनाइयों से भरा
  • पथ्य – परहेज – दवा के साथ पथ्य से रहो, शीघ्र अच्छे हो जाओगे।
  • पुरुष – मर्द – जो कठिनाइयों का सामना न करे, वह पुरुष कैसा?
  • भवन – मकान – इस भवन में कोई नहीं रहता।
  • भुवन – संसार – संसार इस भुवन के रचयिता ईश्वर हैं।
  • मास – महीना – वर्ष में बारह मास होते हैं।
  • मांस – गोश्त – शेर खरगोश का मांस खा रहा था।
  • मूल्य – कीमत – इस पुस्तक का मूल्य क्या है?
  • मूल – जड़ – पेड़ के मूल में खाद-पानी डालो।
  • योग्य – लायक – योग्य लड़का मिले तो रमा की शादी हो।
  • योग – जोड़ – कुल व्यय का योग करके बताओ।
  • युग्म – जोड़ – जोड़ा दो शब्दों का युग्म समास कहलाता है।
  • युगल – दो – युगल भाई समान दिखते हैं।
  • रक्त – खुन – दुर्घटना में उसके सिर से बहुत रक्त बहा।
  • रिक्त – खाली – हमारे कार्यालय में एक पद रिक्त हुआ है।
  • लक्ष – लाख – सोहन के पास दस लक्ष रुपए हैं।
  • लक्ष्य – उद्देश्य – मेरा लक्ष्य डॉक्टर बनना है।
  • समान – बराबर – नरेश महेश के समान चालाक नहीं है।
  • सम्मान – आदर – बड़ों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
  • सर – तालाब – सर में कमल खिले है।
अन्य कुछ श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द के उदहारण
  • शर – बाण – सैनिक ने एक ही शर में शत्रु का सिर धड़ से अलग कर दिया।
  • सर्ग – अध्याय – इस काव्य में कितने सर्ग हैं?
  • स्वर्ग – देवलोक – देवता स्वर्ग में रहते हैं।
  • सदा – हमेशा – हमें सदा बड़ों का आदर करना चाहिए।
  • सादा – सरल – हमें सादा जीवन बिताना चाहिए।

समानार्थी प्रतीत होने वाले भिन्नार्थक शब्द

  • अद्वितीय – जिसके समान दूसरा न हो।
  • अनुपम – जिसकी किसी से तुलना न हो सके।
  • आधि = मानसिक कष्ट (चिंता)
  • व्याधि = शारीरिक कष्ट (ज्वर आदि)
  • आवश्यक = जरूरी।
  • अनिवार्य = जिसके बिना काम न चले।
  • आविष्कार = किसी नई वस्तु का निर्माण।
  • अनुसंधान = पहले से मौजूद, परंतु विस्मृत तथ्यों को प्रकट करना।
  • खोज = किसी छिपी वस्तु को ढूँढना।
  • ईर्ष्या = किसी की उन्नति पर मन ही मन जलना।
  • द्वेष = किसी कारण शत्रुता रखना।
  • स्पर्धा = किसी की प्रगति पर स्वयं भी आगे बढ़ने की इच्छा (होड़)
  • उत्साह = काम करने की उमंग।
  • साहस = शक्ति साधन न होने पर भी काम करना,
  • उपहास = हिम्मत।
  • परिहास = अपमानित करने के लिए हँसी उड़ाना।
  • उपयोग = आपसी विनोद, हँसी-मजाक।
  • प्रयोग = किसी वस्तु को व्यर्थ न जाने देना।
  • कर्म = व्यवसाय या कर्त्तव्य से संबंधित कार्य।
  • काम = सामान्य कार्य।
  • कृपा = छोटों पर की जाने वाली सहायता की भावना।
  • दया = दूसरों के दुःख दूर करने की सामान्य इच्छा।
  • खेद = गलती पर पश्चाताप की भावना सहित दुःख।
  • क्षोभ = असफलता पर होने वाली बेचैनी, झुंझलाहट।
  • दुःख = सामान्य कष्ट।
  • शोक = प्रियजन की मृत्यु पर होने वाला दुख।
  • विषाद = मानसिक पीड़ा।
  • कंगाल = भीख माँगने की सीमा तक गरीब।
  • दीन = सामान्य गरीब, निर्धन।
  • दरिद्र = बहुत गरीब
  • पुत्र = अपना बेटा।
  • बालक = कोई भी लड़का।
  • पूजा = पुष्प, जल आदि से श्रद्धापूर्वक वंदना।
  • अर्चना = देवता की विधि-विधान से पूजा।
  • आराधना = मानसिक रूप से इष्ट की पूजा।
  • भक्ति = ईश्वर या गुरु के प्रति प्रेम और आदर-भाव।

मुझे उम्मीद है की आपको श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द ( homonyms words in hindi ) समझ में आया होगा । अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरूर करे ।

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

Share here
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

1 thought on “श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द अर्थ 100 best homonyms Words”

Leave a Comment