समाचार पत्र निबंध अथवा समाचार पत्रों का महत्त्व

समाचार पत्र निबंध


प्रस्तावना – संसार में नित्य नवीन घटने वाली घटनाओं की जानकारी पाने का सबसे मुख्य साधन समाचार पत्र ही हैं। कोई भी देश इनकी उपेक्षा नहीं कर सकता। लोकतन्त्रात्मक शासन प्रणाली में समाचार पत्र शासक और जनता में माध्यम का अर्थात् दुभाषिये का काम करते हैं। इसकी वाणी जनता जनार्दन की वाणी होती है। विभिन्न राष्ट्रों तथा जातियों के उत्थान एवं पतन में समाचार पत्रों का बहुत बड़ा हाथ रहा है।

समाचार पत्रों का इतिहास – समाचार पत्र निबंध

आज से लगभग चार शताब्दी पहले केवल कर्ण परम्परा के माध्यम से ही समाचार एक-दूसरे तक पहुँचते थे। समाचार पत्र का जन्म इटली के वेनिस नगर में 16वीं शताब्दी में हुआ और इसका प्रचार उत्तरोत्तर बढ़ने लगा। जनता ने • इसकी उपयोगिता का अनुभव किया। अठारहवीं शताब्दी में अंग्रेजों का भारत में आगमन हुआ। इसके साथ ही यहाँ पर ‘समाचार-दर्पण’, ‘कौमुदी’, ‘प्रभात’, ‘उदन्त मार्तण्ड’ आदि समाचार पत्र प्रकाशित हुए। फिर जनता में समाचार पत्रों की लोकप्रियता बढ़ने लगी और देश के विभिन्न अंचलों से भिन्न-भिन्न भाषाओं में अनेक समाचार पत्र निकलने लगे।

समाचार पत्रों का विकास – समाचार पत्र निबंध

भारतवर्ष में जैसे-जैसे मुद्रण-कला का विस्तार – हुआ, उसी गति से समाचार पत्र भी बढ़ते गये। आज यह व्यवसाय अपनी पूर्ण समृद्धि पर है। बड़े और छोटे सभी प्रकार के समाचार-पत्र देश में निकल रहे हैं। अब समाचार पत्रों का प्रकाशन एक विशाल उद्योग-व्यवसाय बन गया है। कम्प्यूटर, टेलीप्रिन्टर, फैक्स आदि नवीनतम साधनों से तथा त्वरित गति के नवीनतम मुद्रण यन्त्रों से समाचार-पत्रों का प्रकाशन अतीव सरल बन गया है। यातायात के साधनों के विकास से भी समाचार पत्रों का तीव्रता से प्रसार होने लगा है।

समाचार पत्रों से लाभ – समाचार पत्र निबंध

देशवासियों की व्यापारिक उन्नति में समाचार पत्र एक बहुत बड़ा सहायक साधन है। अपनी व्यावसायिक उन्नति के लिए हम किसी भी पत्र में अपना विज्ञापन प्रकाशित करा सकते हैं।

पढ़े-लिखे परन्तु बेरोजगार लोग समाचार पत्रों में अपनी आजीविका ढूँढ़ते हैं। सरकारी तथा गैर सरकारी नौकरियों के विज्ञापन के लिए आजकल एक पूरा पृष्ठ समाचार पत्रों में आता है।

समाचार पत्रों में – वैवाहिक विज्ञापन देकर अविवाहित युवक-युवतियों के विवाह सम्बन्ध तय हो जाते हैं। खेल-कूद तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के समाचार भी इनमें छपे रहते हैं। आज के युग में चलचित्रों की इतनी सफलता का श्रेय समाचार पत्रों को ही है। शैक्षणिक समाचारों के साथ परीक्षा परिणाम भी इनमें प्रकाशित होते हैं। भारतीय लोकतन्त्र में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार करने में समाचार पत्रों का अत्यधिक योगदान रहा है। अतः समाचार पत्र सभी के लिए लाभदायक हैं।

समाचार पत्रों से हानियाँ – समाचार पत्र निबंध

जहाँ समाचार पत्र हमारी पूर्णतया सहायता करते हैं, वहाँ अनेक बार उनसे जनहित और राष्ट्रहित दोनों को बड़े घातक परिणाम भोगने पड़े हैं।

कभी-कभी स्वार्थी और बुरी प्रकृति के प्राणी अपनी दूषित और विषैली विचारधाराओं को समाचार पत्रों में प्रकाशित करके दूसरी जाति या अन्य क्षेत्रों के प्रति की भावना फैला देते हैं,

जिससे राष्ट्र में अराजकता बढ़ जाती है, साम्प्रदायिक उपद्रव होने लगते हैं और एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को शत्रु की दृष्टि से देखने लगता है। चारित्रिक दृष्टि से समाचार पत्र कभी-कभी देश को गर्त में ढकेल देते हैं।

अश्लील विज्ञापनों तथा भ्रामक सूचनाओं को प्रकाशित कर समाचार पत्र विकृतियाँ फैलाते हैं। इससे सर्वाधिक हानि होती है।

उपसंहार – आज स्वतंत्रता का युग है। प्रत्येक मनुष्य अपने विचारों को व्यक्त करने में स्वतंत्र है और उन्हें प्रकट करने का उसे जन्मजात अधिकार है। अपने विचारों को जनता तक पहुँचाने का सरल माध्यम समाचार पत्र ही हैं। परन्तु अच्छे लोकतंत्र में समाचार पत्रों की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता जरूरी है। सामाजिक चेतना के परिष्कार की दृष्टि से आज के युग में समाचार पत्रों का अत्यधिक महत्त्व है।

आज हमने इस आर्टिकल में समाचार पत्र निबंध अथवा समाचार पत्रों का महत्त्व के बारे में जाना ।

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