३ अपठित गद्यांश कक्षा 9 के लिए

दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में ३ अपठित गद्यांश कक्षा 9 के लिए बताने वाले है । अगर आप भी कक्षा  9 में पढ़ते है तो आपको यह तीन अपठित गद्यांश बहुत काम आएगा जो एग्जाम में भी आ चुके है ।


३ अपठित गद्यांश कक्षा 9 के लिए

कक्षा 9 के लिए गद्यांश 1

गद्यांश 1. धर्म की सेवा में सर्वस्व बलिदान करने वाले प्राणी सदैव जीवित रहते हैं। उनका भौतिक शरीर चाहे विद्यमान न हो, उनका यश शरीर अपने पूर्ण सौंदर्य और यौवन के साथ दिखाई देता है। वह न कभी जरा-जीर्ण होता है और न काल-कवलित होता है। माता-पिता की सेवा करना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है। कितने दुख उठाकर, कितनी विपत्तियाँ झेलकर वे अपनी संतान का पालन करते हैं। उनके उपकारों का, उनकी सेवाओं का बदला किसी प्रकार भी चुकाया नहीं जा सकता।

इतना होने पर भी यदि मनुष्य, विद्या, धन, यौवन आदि की मदांधता में उनका सम्मान और उनकी सुश्रुषा नहीं करता या यों ही गर्व में या मूर्खता से उनकी सेवा से मुँह मोड़ता है, तो वह कृतघ्न होता है। गुरु सेवा के बिना विद्या लाभ कठिन होता है। विद्या प्राप्त करके भी जो गुरुओं की, शिक्षकों की सेवा में मन नहीं लगाते, उनकी विद्या निष्फल जाती है। कहा गया है कि बड़े-बूढ़ों की सेवा करने वाले व्यक्ति की आयु, विद्या कीर्ति और शक्ति वृद्धि को प्राप्त होती है।

प्रश्न 1. कृतघ्न कौन होते है?
उत्तर- वे लोग कृतघ्न होते है जो माता-पिता की सेवा, सम्मान नहीं करते हैं।

प्रश्न 2. मनुष्य का क्या कर्तव्य बताया गया है?
उत्तर- मनुष्य का कर्तव्य माता-पिता की सेवा करना बताया गया है।

प्रश्न 3. बड़े-बूढ़ों की सेवा करने से क्या लाभ होता है?
उत्तर- बड़े-बूढ़े की सेवा करने से मनुष्य की आयु, यश, विद्या और बल बढ़ता है।


कक्षा 9 के लिए गद्यांश 2

गद्यांश 2. हमारे चारों ओर प्रकृति का जो रूप दिखा पड़ता है या महसूस करते है, इसी को पर्यावरण कहते है। प्रकृति के बिना मानव का कोई महत्व नहीं है। कहा जाता है कि प्रकृति के पाँच तत्वों – भूमि, जल, वायु अग्नि तथा आकाश से मानव बना हुआ है। ओर इन्हीं तत्वों से मिलकर पर्यावरण बना है। इस लिए मानव और पर्यावरण के एक-दूसरे की अनिवार्यता से बने वातावरण को पर्यावरण का रूप में मानते हैं। पर्यावरण अशुद्ध होना ही प्रदूषण है।

वर्तमान में प्रदूषण की समस्या बड़ी है। यह प्रदुषण कि समस्या विज्ञान की देन है। बढ़ते हुए उद्योग धंधों से देखने को मिली है। प्राचीन में जब शहर नहीं बने थे, तब प्रदूषण भी नहीं था। प्रकृति में परसन्तुलन बना हुआ था। वायु और जल भी शुद्ध थे, धरती कि मिट्टी भी उपजाऊ थी।

प्रश्न- (क) मानव प्रकृति के किन पाँच तत्वों से निर्मित है?
उत्तर- मानव प्रकृति के जिन पाँच तत्वों से निर्मित है वे हैं- भूमि, वायु, जल, अग्नि और आकाश।

(ख) पर्यावरण किसे कहते हैं?
उत्तर- भूमि,जल, वायु, अग्नि, और आकाश- इन पाँच तत्वों के सन्तुलन का नाम ही पर्यावरण है।

(ग) ‘प्रदूषण की समस्या विज्ञान की देन है’- कैसे?
उत्तर- विज्ञान के बढ़ते प्रयोग के कारण उद्योग-धंधों का अत्यधिक विस्तार हुआ है, शहरों का निर्माण हुआ है। जिसके कारण प्राकृतिक सन्तुलन बिगड़ गया है और प्रदूषण की समस्या का जन्म हुआ है।

(घ) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर- शीर्षक- विज्ञान की देन- ‘प्रदूषण’।


कक्षा 9 के लिए गद्यांश 3

गद्यांश 3.  मानव की दो स्वार्थ और परमार्थ विशेषता हैं। मानव अधिकतर काम अपने स्वार्थ के लिए करता है दुसरो के लिए बलिदान करना ही मानवता है। यही धर्म, पुण्य है। इसे ही वर्तमान में परोपकार कहते हैं।

हमारे आसपास का पर्यावरण हमें रोज परोपकार ( बलिदान ) का संदेश देता है। नदी दूसरों के लिए बहती है। वृक्ष मनुष्यों को छाया तथा फल देने के लिए, धूप, आँधी, वर्षा और तूफानों में अपना सब कुछ बलिदान कर देते है।

प्रश्न 1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर- शीर्षक- परोपकार।

प्रश्न 2. सच्ची मानवता क्या है?
उत्तर- दुसरो के लिए बलिदान करना ही मानवता है।

प्रश्न 3. वृक्ष किस प्रकार से परोपकार का संदेश देता हैं?
उत्तर – वृक्ष मनुष्यों को छाया तथा फल देने के लिए, धूप, आँधी, वर्षा और तूफानों में अपना सब कुछ बलिदान कर देता है।

प्रश्न 4. उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए।
उत्तर- सारांश- मनुष्य में दो प्रकार की प्रवृत्तियों का निवास होता है। स्वार्थ व परमार्थ। स्वार्थ में वह सिर्फ अपने बारे में सोचता है। परमार्थ में दूसरों के लिए कार्य करने की क्षमता विकसित होती है। यही सच्ची मानवता है।

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