महानगरीय जीवन पर निबंध- Metropolitan Life

महानगरीय जीवन पर निबंध – Essay On Metropolitan Life In Hindi

  • (1) प्रस्तावना-
  • (2) महानगर सुविधाएँ-
  • (3) रोजगार की उपलब्धता –
  • (4) विविध गतिविधियाँ –
  • (5) महानगरीय जीवन के दोष –
  • (6) उपसंहार –

(1) महानगरीय जीवन पर निबंध का प्रस्तावना-

महानगर का अर्थ है-बहुत बड़ा नगर। महानगर की जनसंख्या कई लाख में होती है। इसकी सीमाएँ विस्तृत होती हैं। विभिन्न कारणों से महानगर में नित्य नई बस्तियाँ बनती और विकसित होती रहती हैं।

भारत में दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई आदि अनेक महानगर हैं। वैसे तो मनुष्य का जीवन सर्वत्र एक जैसा ही है। रोटी, कपड़ा और मकान उसकी मूलभूत आवश्यकताएँ हैं। फिर भी गाँवों अथवा कस्बों में रहने वाले लोगों के रहन-सहन से महानगरों के निवासियों का रहन-सहन काफी अलग होता है।

महानगरीय जीवन में जहाँ-अनेक गुण हैं, वहीं उसमें दोष भी कम नहीं हैं पहले इस जीवन की विशेषताएँ देखते हैं।


(2) महानगर सुविधाएँ-

महानगर में नागरिक सुविधाएँ पर्याप्त होती हैं। बिजली, स्वच्छ जल आदि सदैव उपलब्ध रहते हैं। सड़कें चौड़ी तथा समतल होती हैं। जगह-जगह सुन्दर बाग तथा पार्क आदि बने होते हैं। टेलीफोन तथा अन्य संचार साधनों कीbकमी नहीं होती। नागरिकों की स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े-बड़े अस्पताल होते हैं।


(3) रोजगार की उपलब्धता –

महानगर में रोजगार के अनेक अवसर प्राप्त हो जाते हैं। सरकारी तथा गैर-सरकारी कार्यलयों व कारखानों में लाखों लोग कार्य करते हैं। उन लोगों की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक लोगों को रोजगार मिलता है।

वाहनों के ड्राइवर, कंडक्टर, फुटपाथ पर सामान बेचने वाले, सफेदी करने वाले, चौकीदार, कैच (Creche) चलाने वाले, खाना पहुँचाने वाले, घरेलू कार्य करने वाले आदि अनेक प्रकार के लोगों को BUSINESS मिल जाता है।

महानगरों में अच्छे-से-अच्छे विद्यालय तथा महाविद्यालयों खुले होते हैं। दिन में नौकरी या अन्य व्यवसायों में रत युवक सांध्यकालीन कक्षाओं में पढ़ सकते हैं।


(4) विविध गतिविधियाँ –

महानगर में सांस्कृतिक गतिविधियाँ भी पर्याप्त होती हैं। नाटक तथा नृत्य सम्बन्धी कार्यक्रम विभिन्न मंचों पर प्रायः होते रहते हैं। कवि-सम्मेलनों तथा साहित्यिक गोष्ठियों का आयोजन बड़े-बड़े सभागृहों में किया जाता है।

चित्रों तथा मूर्तियों की प्रदर्शनियाँ भी प्राय: लगती रहती हैं। ऐसे कार्यक्रमों से लोगों का कला तथा संस्कृति के क्षेत्र में होने वाले विकास का परिचय मिलता रहता है। इन सब पक्षों की दृष्टि से महानगर का जीवन भरा-पूरा और समृद्ध जान पड़ता है।


(5) महानगरीय जीवन के दोष –

महानगर में अनेक कठिनाइयों तथा समस्याओं का सामना रोज करना पड़ता है। इन समस्याओं का मूल कारण है जनसंख्या की अधिकता। नित्य बढ़ती आबादी के कारण महानगर के दूर-दराज क्षेत्रों में नई बस्तियाँ बन जाती हैं।

इसलिए काम पर जाने के लिए बस आदि का उपयोग आवश्यक हो जाता है। रोज की इस यात्रा में धन के व्यय के अतिरिक्त असुविधा भी बहुत होती है। काम पर पहुँचने और वहाँ से लौटने की शीघ्रता के कारण प्रायः लोग हड़बड़ी में रहते हैं।

अधिक धन कमाने के लिए परिवार में पति-पत्नी दोनों काम पर जाते हैं। बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा पर इससे विपरीत प्रभाव पड़ता है। जनसंख्या की अधिकता से समाज में आत्मीयता और मैत्री नहीं पनप पाती।

महानगरीय जीवन पर 500 शब्दों का निबंध हिंदी में
महानगरीय जीवन पर निबंध हिंदी में

कई बार तो लोग अपने पड़ोसियों तक को नहीं पहचानते। जहाँ देखों भीड़ ही भीड़ दिखाई देती है। महानगर में आबादी की अधिकता से प्रदूषण भी फैलता है। सभी प्रबन्धों के बावजूद अनेक स्थलों पर तंग और गंदी बस्तियाँ विकसित हो जाती हैं।

भूमि, जल तथा वायु-प्रदूषण बहुत होता है। मँहगाई के साथ महानगर में लूटमार और भ्रष्टाचार की घटनाएँ भी अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।


(6) उपसंहार –

महानगर आधुनिक सभ्यता के अनिवार्य अंग हैं। समस्त संसार में इनकी संख्या क्रमश: बढ़ रही है। नि:संदेह महानगर के जीवन में सुधार की आवश्यकता है। ग्रामों तथा कस्बों का विकास इस तरह किया जाना चाहिए कि लोग महानगरों की ओर न दौड़ें।


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